यहाँ Future बनाये नहीं बल्कि फ्यूचर के साथ धंधा किया जाता हैं, आप एक Student हैं तो जरुर पढ़ें

एक टाइम था जब अध्यापक अपने स्टूडेन्ट के लिये सब कुछ करते थें। Extra classes दिया करतें थे वो भी बिना लालच के, पर आजकल  ऐसा ना होता हैं। अगर बात प्राइवेट कोचिंग की हो तो भुल जाओ की वो आपको इस लिये एक्स्ट्रा टाइम दे रहे क्यूँकि आप पढ़ाई मैं अच्छे हो? 

                                  आपको एक्स्ट्रा टाइम इश लिये दिया जा रहा क्यूँकि आप की family का status हाई है या आपकी familly आपके पढ़ाई के लिये कुछ भी कर सकते हैं| आप ये सोच‌‌-सोच रहे होंगे में क्यू  बोल रहा? आपको मालूम चल जायेगी जल्द ही, बस आप ध्यान से पढ़ते जाईये। 

जब आप किसी भी कोचिंग पे जाते हैं पहली बार एडमिशन के लिये वाहा पर होता क्या हैं? 
  • वहा एक lady बेथी रह्ती हैं क्यूँकि lady अपनी बात् जितनी बेहतर से रख सकते हैं उतनी कोई लड़का नही। Simply लालच जीतना बेह्तर तरीके से एक lady दे सकती उतना और कोई ना।
  • वो आप से एक सवाल जरूर करेंगे की आपको ईश इंस्टिट्यूट के बारे कैसे मालूम चला? पूछने का वजह ये हैं की जब आप एडमिशन ले लेंगे तो commission किसके पेट मैं जयेगा। अगर  sign board या internet आपका जवाब है तो समझ जईये की commission उनके ही पेट मैं जाने वाला।
  • वो आपको बोलेंगे की ऑफर लिमिट हैं, seat लिमिट है, न्यु batch लॉन्च होनी वलि या अगले महीने से fee बढ़ने वाला।
  • अगर इतना सुनने के बाद भी आपने एडमिशन ना लिया तो तैयार हो जाउओ उनके कॉल को receive करने का।

अब कलास के अंदर क्या होता हैं जानिये
            एडमिशन तो हो गया अब बात खत्म ना होती, मिशन अब ये रेह्ता है की फँसे हुवे मुर्गे/मुर्गि को दूसरे और कोअर्से पे एडमिशन कैसे कराया जाएँ। ये काम और कोई ना करता आपके teacher करते हैं। आपके teacher आपकी खामी हो या ना हो दूसरे कोअर्से पर एडमिशन लेने को force करेंगे।
             हम सब मैं एक खामी होती हैं खास कर तब जब हम बड़े हो जाते हैं। Teacher जौ सलाह दे तो जोड़-तोड़ से लग जाते हैं उनकी सलाह को मानने के लिये, घर पर force करते हैं नये कोअर्से पर एडमिशन लेने को या हम खुद लग जाते हैं पैसे का जौगार करने को। क्यूँकि हमे लगता हैं की हमें सलाह हमारे Future को बनाने के लीये दी गयी हैं परन्तु यहाँ  Future बनाये नहीं बल्कि फ्यूचर के साथ धंधा किया  जाता हैं| सबसे बड़ी समस्या तो यह है की सलाह किस्से ले ? 

Commission कितनी मिलती हैं?
              सारे इंस्टिट्यूट का अलग अलग होती है कहीं 10% तौ कहीं 20% तो कहीं कहीं 40% भी । आज कल के एजुकेशन सिस्टम  मैं एजुकेशन  रही कहा ?

गलती किसकी? ठीक कैसे होगी सकती हैं? 
           गलती थोड़ी हमारे जैसे आम आदमी की तो है हि उसके साथ Government की भी हैं। अगर प्राइवेट इंस्टिट्यूट की fee फिक्स कर दि जाये तो? मुश्किल जरूर है पर नामुमकिन नही। जरूरत है तो एक बड़े क़दम की। दूसरा हल ये है की Government Institute खोला जाएँ। बड़ी मात्रा मैं की जाये तो ये भी हो सकती हैं। अगर क़दम जल्दी ना उठाया गया तो वो दिन दूर नहीं  जब जौ थोड़ी बहुत भी एजुकेशन रेह गया हो वो भी लालची लोगों की हाथ मैं चली जाएँ। 
आप कोशिस करे की अपनी खामियों को खुद ढूंढने की ना की किसी प्राइवेट टीचर के सलाह लेने के| मै यह न केहता की सारे एक जैसे होते है बस पैसे की चाह सबको एक जैसे बनाते जा रहें|

       

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